अच्छा हुआ तूने ठुकरा दिया .. तेरा प्यार चाहिये था, एहसान नही
दिन छोटे और रातें लंबी हो चली है ,मौसम ने यादों का वक़्त बढ़ा दिया।..
सारी उम्र जिस घर को सजाने में गुजार दी , उस घर में मेरे नाम की तख्ती तलक नहीं !
..जब था तो बहुत पुख्ता था , एक शख़्स से रिश्ता…. ….टुटा है , तो अब टुकड़े संभाले नहीं जाते…
झूठ कहूँ तो लफ़्ज़ों का दम घुटता है, सच कहूँ तो लोग खफा हो जाते हैं..
ताल्लुक अगर हो तो रूह से रूह का होना चाहिए दिल तो अक्सर एक – दुसरे से भर जाया करते Continue Reading..
सारी उम्र मैं जोकर सा बना रहा, तेरे पीछे जिंदगी सर्कस हो गयी।
गिन लेती है दिन बगैर मेरे गुजारें हैं कितने भला कैसे कह दूं कि “माँ” अनपढ़ है मेरी।।
Dil kO teri chahat pe bharOsa bhi bOht hai Or tum se bichar jany ka darr bhi nhi jata
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