नाज़ुक लगते थे जो हसीन लोग, वास्ता पड़ा तो पत्थर के निकले.
हमने कहाँ आज कुछ मीठा बनाओ उन्होंने ऊगली अपने होठो पर रख दी !
मोह्ह्ब्ब्त की कहानी को मुकम्म्ल नही कर पाये… अधूरा था जो किस्सा अधूरा ही छोड आये
Mujhe Ek Baat Se Bahut Sukoon Milta Hai. Mera Koi Nahi But Mai Sabka Hun.. !!
इश्क के तोहफे, तुम क्या जानो सनम, तुमने तो इश्क भी ऐसे किया, जैसे ख़रीदा हो
Itna asaan nahin tha mujh ko bhulaana, Uss ne khud ko ganwaa diya ho ga..
पढ़ रहा हूँ मै इश्क़ की किताब ऐ दोस्तों…… ग़र बन गया वकील तो बेवफाओं की खैर नही – v
गिला भी तुझ से बहुत है, मगर मोहब्बत भी, वो बात अपनी जगह है, ये बात अपनी जगह
कितना अच्छा होता…तुम जो मतलबी होते… और तुम्हें सिर्फ….मुझसे ही मतलब होता…
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