नाज़ुक लगते थे जो हसीन लोग, वास्ता पड़ा तो पत्थर के निकले.
कितनी मासूम सी है ख्वाहिस आज मेरी कि नाम अपना तेरी आवाज़ से सुनूँ !!!
चलता रहूँगा मै पथ पर, चलने में माहिर बन जाउंगा, या तो मंज़िल मिल जायेगी, या मुसाफिर बन जाउंगा !
शायरी शौक नही, और नाही कारोबार है मेरा, बस दर्द जब सह नही पाता, तो लिख देता हूँ
~ Aazmaate Hai Log Sabr Mera .. Baar Baar Zikr Kr K Tera .. ^
Kabhi Waqt Mila To Suljhaon Ga Teri Sabhi Uljhaney, Abhi To Khud Uljha Hua Hun Waqt Ko Suljhane Main
रंग कैसा है तुम्हारे प्यार का.. जख़्म दिल के सब गुलाबी हो गए
खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की … आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है…
ठुकराया हमने भी बहुतों को है…तेरी खातिर,,, तुझसे फासला भी शायद…उन की बददुआओं का असर हैं …!!!!
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