नाज़ुक लगते थे जो हसीन लोग, वास्ता पड़ा तो पत्थर के निकले.
वो कागज आज भी फुलो से ज्यादा महकता है दोस्तों जिस पर उन्होंने मजाक में लिखा था कि हमें तुमसे Continue Reading..
हम ना पा सके तुझे मुदतो के चाहने के बाद , ओर किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमे Continue Reading..
मेरे लफ्जो से मत कर मेरे किरदार का फैसला . तेरा वजूद मिट जाएगा मेरी हकीकत ढुढते ढुढते ණ™
माना की मरने वालों को भुला देतें है सभी. . . मुझे जिंदा भूलकर उसने कहावत ही बदल दी
ख़्वाहिशों की चादर तो कब की तार तार हो चुकी… देखते हैं वक़्त की रफ़ूगिरी, क्या कमाल करती है|
जरा तो शर्म करती तू पगली. मुहब्ब्त चुप चुप के और नफरत सरे आम.
मेरी एक छोटी सी बात मान लो, लंबा सफर है फकीरा हाथ थाम लो…
“मर्दाना कमजोरी” के इलाज पर रंगी हुई है शहरों की दीवारें… और लोग कहते हैं कि “औरतें कमज़ोर” हैं…
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