जरा तो शर्म करती तू पगली. मुहब्ब्त चुप चुप के और नफरत सरे आम.
उपलब्यधियाँ और आलोचनाएँ एक दुसरे की मित्र है उपलब्यधियाँ बढेगी तो निशचित ही आपकी आलोचनाएँ भी बढेगी
दिन में ना जाने कितनी बार होता है ऐसा… तेरी याद आना और मेरा उदास हो जाना
Phiir Jab Meiin Uske Bina Jeenay Lagii, Usey Merii Kamii Mehsoos Honey Lagii ..
~Yoon Mohabbat Nibhaane Ka Dawa Na Karo Aye Logo, Wo Bhi Mujhe Chor Gaya Hai Qasam Uthaaney K Baad .. Continue Reading..
निकाल दिया उसने मुझे अपनी जिंदगी से भीगे कागज की तरह, ना लिखने के काबिल छोड़ा और ना जलने के Continue Reading..
अब तो इतवार में भी कुछ यूँ हो गयी है मिलावट छुट्टी तो दिखती है पर सुकून नजर नहीं आता
दो चार नहीं…मुझे सिर्फ एक दिखा दो… वो शख्स…जो अन्दर भी बाहर जैसा हो… !
कौन कहता है कि मुसाफिर ज़ख़्मी नहीं होते, रास्ते गवाह है बस गवाही नहीं देते.
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