जरा तो शर्म करती तू पगली. मुहब्ब्त चुप चुप के और नफरत सरे आम.
DiL लेकर क्या KaRoGi बताओ तो sAHi tUm_sE ज़ुल्फें तो ApNi संभाली नहीं JaTi..
Kaun yaad rakhta hai pyar karne walo ko, Jo jitni gahri chot deta hai, wo utna hi yad rahtaa hai..
तुम रख ना सकोगे मेरा तोहफा सभालकर वरना मै तुमको अभी दे दु अपने जिस्म से रूह निकाल कर
आज मेरे लफ्जों की तबियत ठीक नहीं.. आज आप अपने पसंद की कोई शायरी ही सुना दो
फ़रियाद कर रही है ये तरसी हुई निगाह, देखे हुए किसी को कई दिन गुज़र गए..
“Mere lafzo ki pehchan agr wo kr lyn” “Inhen mujh se nahi khud se muhabat ho jaye”..
इत्तेफ़ाक़ से मिल जाते हो जब वो राह में कभी, यूँ लगता है करीब से ज़िन्दगी जा रही हो जैसे।
Ye wajbaat_e_ishQ hum pe hi Qarz kyu …?? Wo bhi adaa kry k muhabbat usy bhi thi …
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