जब तक ना लगे बेवफाई की ठोकर हर किसी को अपनी पसंद पर नाज़ होता हे
इक बात बेखौफ मुझसे कहता है आईना , कभी आदमी अच्छे हुआ करते थे तुम भी …..
Ae gham-e-zindagi na ho naraz, Mujhe ko aadat hai muskuraane ki..
ना पा सका उसे, यू सारी ‘उम्र’ चाहकर, कोई’ ले गया उसे, कुछ ‘रस्मेँ’ निभाकर.
सारी उम्र मैं जोकर सा बना रहा, तेरे पीछे जिंदगी सर्कस हो गयी।
Sharafat ki duniya Ka kissa hi Khatam, ab jaisi duniya, waise hum.
Nazdeek Ho Kar Bhi Woh Itna Door Hai Mujh Sy, Ishara Ho Nahi Sakta, Pukara Ja Nahi Sakta..
जो जिन्दगी आप अभी जी रहे है बहुत से लोगो के लिए अभी भी सपना है
चलता रहूँगा मै पथ पर, चलने में माहिर बन जाउंगा, या तो मंज़िल मिल जायेगी, या मुसाफिर बन जाउंगा !
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