मुझे फर्क नहीं पता अपनो और गैरो का, हर कोई हँसा है मुझे रोता देखकर
मिल जायेंगा हमें भी कोई टूट के चाहने वाला अब शहर का शहर तो बेवफा नहीं हो सकता…
छोडना पडा उन्हे इतनी मोहब्बत कर के भी, मैंने ‘उन्से’ प्यार किया था, उन्के बदलते हूए ‘चेहरो’ से नहीं….
~Sard Mausam Meiin Bohat Yaad Aatey Haii, Dhund Meiin Lipte Huye Waade Unke .. ‘
मुझे रिश्तो की लंबी कतारोँ से मतलब नही , कोई दिल से हो मेरा, तो एक शख्स ही काफी है..।
सोचते थे तुमसे बिछड़ के जी नहीं पायेंगे, हाँ जी तो रहे है “मौत का इंतजार करते करते।”
Kuch nae mila bus ek sabaq de gaya..!! Khak ho jata hai insan khak se bane insan k liye
Udaasii Kaan Meiin Chup Kay Sey Kehney Lagii, Meiin Thak Gaye Hoon Chalii Jaun Agar Ijazat Ho ..
यूँ बार बार निहारती हो आईना, ख़ूबसूरती पे गुमान है.. या शक।
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