मुझे फर्क नहीं पता अपनो और गैरो का, हर कोई हँसा है मुझे रोता देखकर
हाथ मे बस एक ‘बासुँरी’ कि कमी है वरना, गोपिया हमने भी कई ‘फसाई’ है..!!
मत किया कर ऐ दिल किसी से मोहब्बत इतनी.. जो लोग बात नहीं करते वो प्यार क्या करेंगे…!!”
याद रहेगा ये दौर-ए-हयात हमको, क्या खूब तरसे हैं जिन्दगी में एक शख्स के लिए ।।
मुझे आज भी उसकी शिद्दत रोने नही देती …! कहती थी मर जायेंगें तेरे आँसुओं के गिरने से पहले
फिर से बुनने लगे ख्वाब एक नया, जाने कबतक ये सिलसिला चले इंतजार का
शीशा टूटने के बाद बिखर जाए वो ही बेहतर है, क्यूंकि दरारें ना जीने देती है और ना ही मरने Continue Reading..
शायरी शौक नही, और नाही कारोबार है मेरा, बस दर्द जब सह नही पाता, तो लिख देता हूँ
गर तू पुलिस वाली होती, पा लेते तुझे कुछ ले दे कर।
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