मुझे फर्क नहीं पता अपनो और गैरो का, हर कोई हँसा है मुझे रोता देखकर
किताबें भी पढ़ने का शौक़ नहीं था हमें, और इस इश्क़ ने आँखें पढ़ना सिखा दिया !!
तेरा नाम जुबाँ पर आते आते रुक जाता है… . जब कोई मुझसे मेरी आखरी ख्वाहिश पूछता है…
हमने लिया सिर्फ होंठों से जो तेरा नाम.. दिल होंठो से उलझ पड़ा कि ये सिर्फ मेरा है !!
कोई चेहरे का दीवाना, किसी को तन की तलब!! अदाएं पीछा करवाती हैं, मोहब्बत कौन करता है
असल मे वही जीवन की चाल समझता है जो सफर की धुल को भी गुलाल समझता है
Normal People – थोड़ा है, थोड़े की ज़रूरत है। Sharabi – दारु है, सोडे की जरूरत है।
कितना समेटे खुद को बार बार, टूट के बिखरने की भी सीमा होती है ||
नहीं मिलेगा तुझे कोई हम सा, जा इजाजत है ज़माना आजमा ले.
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