कितना अच्छा होता…तुम जो मतलबी होते… और तुम्हें सिर्फ….मुझसे ही मतलब होता…
मजबुरीयां तुमहारी थी और देख …!! तनहा हम हाे गऐ
तेरा नाम था आज किसी अजनबी की जुबान पे… बात तो जरा सी थी पर दिल ने बुरा मान लिया…
में खुश हूँ कि उसकी नफरत का अकेला वारिस हूँ वरना मोहब्बत तो उसे कई लोगो से है…..
-Ghar Mera Kash Tere Ghar Kay Barabar Hota, Tu Na Aata Terii Aawaz To Aya Kartii .. ‘
कुछ लोग आए थे मेरा दुख बाँटने मैं जब खुश हुआ तो खफा होकर चल दिये
सिलसिला ये चाहत का दोनो तरफ से था, वो मेरी जान चाहती थी और मैं जान से ज्यादा उसे
ज़िन्दगी की हकीकत को बस इतना ही जाना है !. दर्द में अकेले हैं और खुशियों में सारा जमाना है
Hum na pa sake tuje muddato se chahne ke baad or Kisi ne apna bana liya tuje chnd rasmein nibhane Continue Reading..
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