तुम तो मुझे रुलाकर दूर चले गये.. मै किससे पूछूँ मेरी खता क्या है..
गिला भी तुझ से बहुत है, मगर मोहब्बत भी, वो बात अपनी जगह है, ये बात अपनी जगह
कौन कहता है कि मुसाफिर ज़ख़्मी नहीं होते, रास्ते गवाह है बस गवाही नहीं देते.
मेरी बरबादियों में तेरा हाथ है मगर……. में सबसे कह रहा हूँ ये मुकद्दर की बात है…
ना जाने क्यों मुझे लोग मतलबी कहते है एक तेरे सिवा दुनियां से मतलब नहीं मुझे।
::..कभी कभी लोग बेहतर👌🏻की तलाश में, बेहतरीन को खो देते है..:👆🏻😏
~ बड़ा अजीब सा जहर था उसकी यादों का सारी उम्र गुजर गयी मरते – मरते .. ^
धोखा देती है अकसर मासुम चेहरो की चमक हर काँच का टुकडा हीरा नही होता
“तुम्ही आकर थाम लो ना मुझे .! बाबू सब ने छोड़ दिया है मुझे तेरा समझकर ..!!”
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