कितनी मासूम सी है ख्वाहिस आज मेरी कि नाम अपना तेरी आवाज़ से सुनूँ !!!
इतनी चाहत से ना देखा कीजिए महफिल मे आप . आप के शाहर वालो से दुशमनी बढ जाएगी
चेहरे “अजनबी” हो जाये तो कोई बात नही, लेकिन रवैये “अजनबी” हो जाये तो बडी “तकलीफ” देते हैं !
तुम से जिद करते तो हम मांगते क्या…! खुद से जिद करके तो तुमको मांगा था.
नींद छीन रखी है उसकी यादों ने, गिला उसकी दूरी से करें या अपनी चाहत से !!
~Kismat Ki Lakeeron Par Aitbaar Karna Chor Dia Jab Insaan Badal Sakte Hain To Ye Lakeeren Kyun Nahi .. ^
-Guzar Hi Jayengi Furqat Ki Ye Lambii Raatein, Jo Tu Nahi Na Sahi Tera Intezaar To Haii .. ‘
अगर बेवफाओं की अलग ही दुनिया होती तो, मेरे वाली…कमीनी…वहाँ की रानी होती
बड़ी मुश्किल से बना हूँ टूट जाने के बाद, मैं आज भी रो देता हूँ मुस्कुराने के बाद !
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *