कितनी मासूम सी है ख्वाहिस आज मेरी कि नाम अपना तेरी आवाज़ से सुनूँ !!!
-Akele Hum Hii Shamiil Nahii Haii Is Jurm Meiin ‘Jnaab Nazreiin Jab Milii Thii Muskuray Tum Bhii The .. ‘
~Woh Acha Haii Toh Behtar Bura Haii Toh Bhii Qabool, Mizaaj’E-Ishq Meiin Aib’E-Yaar Nahi Dekhey Jatey .. ^
Ek sukun or ek tum Pta nhi Kahn gum ho jate ho
“सूखे हुए दरिया से इक नाव लगी कहने, अपना भी जाने अब किस बात से रिश्ता है
उसके जाने के बाद मोहब्बत नहीं करते हम किसी से छोटी सी ज़िन्दगी है किस किस को आजमाते रहेंगे
बहुत सोचा, बहुत समझा, बहुत देर तक परखा, तन्हा हो के जी लेना मोहब्बत से बेहतर है
नाकामयाब मोहब्बत ही सच्ची होती है !! कामयाब होने के बाद मोहब्बत नहीं बचती !!
ज़िन्दगी तो बेवफ़ा है एक दिन ठुकराएगी…!!! . . मौत महबूबा है अपने साथ लेकर जाएगी…!!!
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