किसी से कुछ नही कहूंगा में देख लेना एक दिन यूँही मर जाऊंगा में
कहा था ना मैने “सोच लो तुम” जिन्दगी भर रिश्ते निभाना आसान नहीं होता..
दुश्मन के सितम का खौफ नहीं हमको, हम तो दोस्तो के रूठ जाने से डरते है !
ऐब भी बहुत हैं मुझमें और खूबियां भी.. ढूँढने वाले तूं सोच, तुझे चाहिए क्या मुझमे..
Bahut khaas the kabhi nazro mai kisi ke hum bhi, Magar nazro ke takaze badalne main der kaha lagti hai
~Kuch Samaj Nahii Aatii Sheher Ke Logo’n Kii .. Yun’Hii Rooth Jate Haii Aayina Dikhane Par .. ^
कितने ही दिल तोड़ती है ये फरवरी…, ..यूं ही नही बनाने वाले ने इसके दिन घटाये होंगे… )
मेरी ज़िन्दगी का खेल शतरंज से भी मज़ेदार निकला. मैं Haari भी तो apne ही Raaje से..!!
गुज़र रहा हूँ तेरे शहर से क्या कहूँ क्या गुज़र रही है.
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *