मन्दिर मस्जिद सी थी मोहब्बत मेरी, बेपनाह इबादत थी फिर भी एक न हो सके
किसी को प्यार करो तो इतना करों की उसे जब भी प्यार मिलें… तो तुम याद आओ….
कुछ लोग आए थे मेरा दुख बाँटने मैं जब खुश हुआ तो खफा होकर चल दिये
अन्दाज़ कुछ अलग ही मेरे सोचने का है, मंज़िल का सब को है शौक़, मुझे रास्ते का है….
सिर्फ एक ही तमन्ना रखते हैं हम अपने दिल में… बस महोब्बत से याद करो चाहे मुद्दतों न बात करो..
“क्या लिखूँ अपनी जिंदगी के बारे में दोस्तो, वो लोग ही बिछड़ गए जो जिंदगी हुआ करते थे !!”
तुझे पाने की चाह में इतना कुछ खोया है, की अब तू मिल भी जाए तो भी अफ़सोस होगा।
हम इतने बिगड़े हुए नहीं हैं कि लोग हमें पैर पर समझ ले आज आपका दिन है आ रहा हूं Continue Reading..
इतनी मतलबी हो गई हैं आँखें मेरी, कि तेरे दीदार के बिना दुनिया अच्छी नहीं लगती..!!!
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *