पत्थर समझ कर हमे मत ठुकराओ कल हम मंदिर मे भी हो सकते है
बहुत सोचा, बहुत समझा, बहुत देर तक परखा, तन्हा हो के जी लेना मोहब्बत से बेहतर है
खाना बना रही थी ना इसलिए गरम हूं, ये केहकर एक माँ ने अपना बुखार छूपा लिया.
फिर से हो रही थी मोहब्बत उन्हें मुझसे…. ना खुलती आँख तो ,बस वो मेरे हो ही चुके थे… ..✍♡💕
हम एक दिन महरूफ़ क्या हुए, जनाब ने तोहमत लगा दी खुद को भूल जाने की.
जाने कब आँख लगी, यादों के दीये जलते रहे, रोशनी घुलती रही, ख्वाबों में तेरी महक आई है !
Tujhse judaa judaa huaa main judaa hua, Mujhse khafa khafa yahan mera khuda hua
वक़्त भी लेता है करवटे ना जाने क्या क्या … उमर इतनी तो नही थी जितने सबक सीख लिये हमने
अगर मेरी माँ और उसकी होने वाली बहू मेरे साथ है, तो इस कमबख्त दुनिया की मेरे सामने क्या औकात Continue Reading..
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