वो जो मुझे हँसते हुए देख कर खुश समझते हैं , वो अभी मुझे समझे नहीं।
भूख तो एक रोटी से भी मिट जाती माँ, अगर थाली की वो एक रोटी तेरे हाथ की होती
रिश्तों के दलदल से, कैसे निकलेंगे जब हर साज़िश के पीछे, अपने निकलेंगे!
Itna asaan nahin tha mujh ko bhulaana, Uss ne khud ko ganwaa diya ho ga..
पढ़ रहा हूँ मै इश्क़ की किताब ऐ दोस्तों…… ग़र बन गया वकील तो बेवफाओं की खैर नही – v
बदला वफाओं का देंगे बहुत सादगी से हम..!! तुम हमसे रूठ कर देखो और हम ज़िंदगी से मुह फेर लेंगे..!!
~Tujhe Khabar Hai Tujhey Sochney Ki Khatir, Bohat Se Kaam Meiin Kal Par Chorr Detii Hoon .. ‘
वो दुआएं काश मैने दीवारों से मांगी होती, ऐ खुदा.. सुना है कि उनके तो कान होते है!!
Mat puchh kaise guzar rahi hai zindagi, Us daur se guzar rahi hu jo guzarta hi nahi
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