~Kitnii Dilkash Hai Us Ki Khamoshii, Sarii Bateiin Fazool Hon Jaiise .. ‘
जिस शख्स के लिए मुझे ठुकरा गए थे तुम, मैंने सूना है कि वो भी तुम्हारा नहीं हुआ !!
कभी झुकने की तमन्ना कभी कड़वा लहजा अपनी उलझी हुयी आदतों पे रोना आया
तमन्ना थी सदा जिनके करीब रहने की❤ अब खुद ही उनसे बहुत दूर हुए जा रहा हूँ।
तेरी मुहब्बत की तलब थी तो हाथ फैला दिए वरना, हम तो अपनी ज़िन्दगी के लिए भी दुआ नहीं करते…
Yahan Behtar Hai Apni Zaat Ka Hamdard Ho Jana Zamana Gham To De Sakta Hai Gham-Khawari Nahi Karta
~Hum To Agaaz’E-Mohabbat Mein Hi Lutt Gy, Log Toh Kehte The Ke Anjaam Bura Hota Haii .. ‘
उपलब्यधियाँ और आलोचनाएँ एक दुसरे की मित्र है उपलब्यधियाँ बढेगी तो निशचित ही आपकी आलोचनाएँ भी बढेगी
वो रोटी चुरा के चोर हो गया. . . लोग मुल्क खा गए, कानून लिखते लिखते.
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