जिस्म छू के तो.. सब गुज़रते हैं.. रूह छूता है कोई.. हज़ारों में..
मुझे फर्क नहीं पता अपनो और गैरो का, हर कोई हँसा है मुझे रोता देखकर
Zawaal yeh hai ke tera saath nahin, Kamaal yeh hai ke jee rahy hain..
तेरी गली में आकर के खो गये हैं दोंनो.! मैं दिल को ढ़ूँढ़ता हुँ दिल तुमको ढ़ूँढ़ता है.!
~Mere Haq Me Khushiyon Ki Dua Karte Ho, Tum Khud Mere Kyun Nahi Ho Jate .. ^
मंजिल नजदीक ही थी कि बीच में तूफ़ान आ गया …!! फिर जो मुझ पर गुज़री वो किनारों से पूछ Continue Reading..
अपनी मौत भी क्या मौत होगी ,, एक दिन यूँ ही मर जायेंगे तुम पर मरते मरते !! :’)
तकलीफ कि इन्तेहा तो तब है, जब लोग जिंदा रहे और रिश्ते मर जाये…
कौन कहता है कि मुसाफिर ज़ख़्मी नहीं होते, रास्ते गवाह है बस गवाही नहीं देते.
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