हम जिस्म को नही रूह को वश मे करने का शोक रखते है
हजारों अश्क़ मेरी आँखों की हिरासत में थे, फिर उसकी याद आई और इन्हें जमानत मिल गई
सिर्फ दिल का हक़दार बनाया था तुम्हें…… हद हो गयी तुमने तो जान भी ले ली..
je pyr bhi ajeeb h, jo ise jan le…. ye kmbkhat usi ki jaan le leta h….
किसी और का हाथ कैसे थाम लूँ…. वो तन्हा मिल गयी कभी तो क्या जवाब दूँगा…..!!
वो मोहब्बत भी जहर बन जाती है….. अगर किसी को हद से ज्यादा चाहो……
वापिस लौट आया हवाओ का रुख मोड़ने वाला, दिल❤ मे उतर रहा है फ़िर कमबख्त दिल💔 तोड़ने वाला
हजारों गम हो फिर भी मैं खुशी से फूल जाता हूँ… जब हंसती मेरी मां, मैं हर गम भूल जाता Continue Reading..
“सूखे हुए दरिया से इक नाव लगी कहने, अपना भी जाने अब किस बात से रिश्ता है
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