हम जिस्म को नही रूह को वश मे करने का शोक रखते है
एहसान किसी का वो रखते नही मेरा भी लोटा दिया . जितना खाया था नमक मेरे जख्मोँ पर लगा दिया
कुछ नहीं होगा तो आँचल में छुपा लेगी मुझे, माँ कभी सर पे खुली छत नहीं रहने देगी !
भरने को तो हर ज़ख्म भर जाएँगे, कैसे भरेगी वो जगह जहां तेरी कमी होगी !!
Hote hain shayad sirf nafrat mein hi pakke rishte, Warna ab to tan se libaas utarne ko mohhabat kehte h
हमारी तो ज़ुबान भी इतनी बात नहीं करती •• जितनी तुम्हारी आंखें करती है
वो बड़े ताज्जुब से पूछ बैठा मेरे गम की वजह.. फिर हल्का सा मुस्कराया, और कहा, मोहब्बत की थी ना… Continue Reading..
नफ़रत करना तो कभी सिखा ही नहीं,,, हमने दर्द को भी चाहा है अपना समझ कर… :))
शुक्र है हँसी बाजार में नहीं बिकती साहब, वरना लोग गरीबों से यह भी छीन लेते
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