JiSki nazron mein hum nhi ache…..
Kuch toh woh app bhi bUre honge…
गिला बनता ही नहीं बेरुखी का, दिल ही तो है, भर गया होगा।
Aa kuch likhdu tere bare meIN, Tu bhi dhundhti hogi khud ko mere Lafzon meIN
इतना शौंक मत रखो इन इश्क की गलियों में जाने का; क़सम से रास्ता जाने का है आने का नहीं!
बेवफाई तो सभी कर लेते है जानेमन , तू तो समझदार थी कुछ तो नया करती
जा और कोई ज़ब्त की दुनिया तलाश कर ऐ इश्क़ हम तो अब तेरे काबिल नहीं रहे।
दम तोड़ जाती है हर शिकायत लबों पे आकर, जब मासूमियत से वो कहती है मैंने क्या किया है
कितना समेटे खुद को बार बार, टूट के बिखरने की भी सीमा होती है ||
~ Badal Gaya Kyun Mizaaj Uska Kuch Hi Mudaat Mein Wo To Kehta Tha Badaltay Log Usey Ache Nahi Lagte Continue Reading..
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