काश में लौट जाओ बचपन की वादियो में जहाँ कोई न जरूरत थी और ना कोई जरुली था
थोडी सी रोशनी मांगी थी हमने मगर चाहने वाले ने तो आग ही लगा दी!!!!
एक गलत इन्सान की वजह से कभी कभी, हमें पूरी दुनिया से नफरत हो जाती है !!
यूँ गुमसुम मत बैठो पराये से लगते हो, मीठी बातें नहीं करना है तो चलो झगड़ा ही कर लो…!!
जनाज़ा इसीलिए भारी था उस गरीब का…!! क्योकि वह सारे अरमान साथ लेकर चला गया…!!
यार वो लम्हा भी कितना खास होगा…. जब तू सिर्फ और सिर्फ मेरे साथ होगा..!!
ए मुसीबत जरा सोच के आन मेरे करीब, कही मेरी माँ की दुवा तेरे लिए मुसीबत ना बन जाये.
Dil bhi gustakh ho chala tha mera.. Shukar he aap be wafaa niklay..
Us Ke Ik Ik Lamhe Ki Hifazat Karna, AY KHUDA Masoom Saa Chehra Hai Udaas Ho To Achaa Nhi Lagta…!!!
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