एक सुखी पति था………….. * * * * * * * * * * जाँच चल रही है किसका था।
मुकाम वो चाहिए मुझे, की जिस दिन भी हारु , . उस दिन जीतने वाले से ज्यादा मेंरे चर्चे हो
Aa kuch likhdu tere bare meIN, Tu bhi dhundhti hogi khud ko mere Lafzon meIN
*न जाने कैसी “नज़र” लगी है “ज़माने” की…* कमब्खत *”वजह”* ही नही मिलती *”मुस्कुराने”* की.
Barish gire na gire sagar chalkta he tum milo na milo zindgi chalti rehti he
लफ्ज़ पहचान बने मेरी तो बेहतर है..!! चेहरे का क्या है, साथ ही चला जाएगा एक दिन
सुनो आज आखरी बार अपनी बाँहों में सुला लो . अगर आँख खुले तो उठा देना , वरना सुबह हमे Continue Reading..
खुदा कि बंदगी कुछ अधुरी रह गयी, तभी तेरे मेरे बीच ये दूरी रह गयी.
वो कर रहे थे महफिल मे जिक्र अपनी वफा का . नजर मुझ पर पडी तो बात ही पलट दी
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