जीभ मे हड्डीया नही होती फिर भी जीभ हड्डीया तुडवाने की ताकत रखती है
हद से ज्यादा बढ चुका है तेरा नजरअंदाज करना; ऐसा सलूक ना करो कि हम भूलने पर मजबूर हो जाये…!
खवाब टूटे मगर हौसले जिंदा है । हम वो है जहाँ मुश्किले भी शर्मिंदा हैं ।
*खुद बीमार होकर भी पूछती है तबीयत मेरी…* *माँ कमजोर है थोड़ी लेकिन मजबूत बड़ी है
फिर से बुनने लगे ख्वाब एक नया, जाने कबतक ये सिलसिला चले इंतजार का
जो बिना ठोकर खाए मजिँल तक पहुच जाते है उनके हाथ अनुभव से खाली रह जाते है
Hote hain shayad sirf nafrat mein hi pakke rishte, Warna ab to tan se libaas utarne ko mohhabat kehte h
मुझे अपने दर्द की परवाह नही भगवान करे तू हमेसा खुश रहे
निग़ाहों में अभी तक दूसरा कोई चेहरा ही नहीं आया.. !! भरोसा ही कुछ ऐसा था,तेरे लौट आने का…!!
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