असल मे वही जीवन की चाल समझता है जो सफर की धुल को भी गुलाल समझता है
बना के “ताजमहल” एक दौलतमंद आशिक ने….. “गरीबों” की मोहब्बत का तमाशा बना दिया।।
फिर से वही प्यारी सी पहचान देखनी है। मुझे तेरे चेहरे पर अपनी मुस्कान देखनी है।..
बहुत सोचा कि अब बात ही नही करूँ तुमसे, फिर सोचा झगड़ा किससे करूँगा |
जिस्म छू के तो.. सब गुज़रते हैं.. रूह छूता है कोई.. हज़ारों में..
जब तक ना लगे बेवफाई की ठोकर हर किसी को अपनी पसंद पर नाज़ होता हे
ना किया करो कभी किसी से दिल दुखाने वाली बात… सुना है दिल पे निशाँ रह जाते हैं सदियो तक.
बारिश की बूंदों में झलकती है तेरी तस्वीर, आज फिर भीग बैठे तुझे पाने की चाहत में !! >
Jindagi uhi gujar jati hai kisike intejar me, kyo chhod jate hai wada karke pyar me.
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