असल मे वही जीवन की चाल समझता है जो सफर की धुल को भी गुलाल समझता है
~Phiir Thehr Gyii Aanko’n Meiin Namii Phiir Dil Ne Kaha Ek Terii Kamii .. ‘
मन्दिर मस्जिद सी थी मोहब्बत मेरी, बेपनाह इबादत थी फिर भी एक न हो सके
तेरी यादोँ के ‘नशे’ मेँ, अब ‘चूर’ हो रहा हूँ, लिखता हूँ ‘तुम्हेँ’ और, ‘मशहूर’ हो रहा हूँ.
je pyr bhi ajeeb h, jo ise jan le…. ye kmbkhat usi ki jaan le leta h….
~Woh Ab Lakhon Dilon Se Khelta Haii, . . Mujhe Pehchan Ley Itna Bohat Haii .. ‘
उन्हें वहम है कि बस मुँह फेरकर भुला पाएँगे हमें …. कोई समझाए कि आँखें मूँदने से रात नहीं हुआ Continue Reading..
ख़ुबसूरत था इस क़दर के महसूस ना हुआ,,,,,,,, कैसे कहाँ और कब मेरा बचपन चला गया
लोग तो वही रहते है बस वक्त के साथ उनका बर्ताव बदल जाता है
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