असल मे वही जीवन की चाल समझता है जो सफर की धुल को भी गुलाल समझता है
मर जाने के लिए थोड़ा ज़हर काफ़ी है, मगर जीने के लिए काफ़ी ज़हर पीना पड़ता है।
जैसे जैसे उम्र गुजरती है एहसास होने लगता है कि माँ बाप हर चीज़ के बारे में सही कहते थे
मोह्हब्ब्त किसी से तब ही करना जब निभाना सिखलो .. मजबूरियों का सहारा लेकर छोड़ देना वफादारी नही होती.
बना के “ताजमहल” एक दौलतमंद आशिक ने….. “गरीबों” की मोहब्बत का तमाशा बना दिया।।
*खुद बीमार होकर भी पूछती है तबीयत मेरी…* *माँ कमजोर है थोड़ी लेकिन मजबूत बड़ी है
आज गुमनाम हूँ तो ज़रा फासला रख मुझसे… कल फिर मशहूर हो जाऊँ तो कोई रिश्ता निकाल लेना..!!
चाह कर भी पूछ नहीं सकते हाल उनका, डर है कहीं कह ना दे कि ये हक तुम्हें किसने दिया।..
दिल की बात साफ़ साफ़ बता देनी चाहिए ,,,, क्योंकि बता देने से फैसले होते हैं और ना बताने से Continue Reading..
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