Gham_e_khas perr kabhi chup rhy … Kabhi rO diy gham_e_aam per …!!!
ख्वाहिश नहीं मुझे मशहूर होने की। आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी
बेवफाई तो सभी कर लेते है जानेमन , तू तो समझदार थी कुछ तो नया करती
कुछ पतंगें तो मैंने यहीं सोचकर काट दी यारों… कि उन्हें बेचकर चौराहे पर खड़े ग़रीब का पेट तो भरेगा Continue Reading..
सिर्फ दिल का हक़दार बनाया था तुम्हें…… हद हो गयी तुमने तो जान भी ले ली..
फेसबुक पर विचारो का चुराना आम बात है कम ही है जो खुद के विचार रखते हैं
तकलीफ कि इन्तेहा तो तब है, जब लोग जिंदा रहे और रिश्ते मर जाये…
इतना टूटा हूँ के छूने से बिखर जाऊँगा, अब अगर और दुआ दोगे तो मर जाऊँगा
मोहब्बत😍 सब्र के अलावा कुछ भी तो नहीं है शायद,,,,,😓😓 मैंने हर इश्क़ज़ादे 🙇को सिर्फ इंतज़ार करते देखा है
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