खुदा कि बंदगी कुछ अधुरी रह गयी, तभी तेरे मेरे बीच ये दूरी रह गयी.
किसी और का हाथ कैसे थाम लूँ…. वो तन्हा मिल गयी कभी तो क्या जवाब दूँगा…..!!
बंजर नहीं हूँ मैं मुझमें बहुत सी नमी है,,,, आँखे बयाँ नही करती बस इतनी सी कमी है!!!
Zawaal yeh hai ke tera saath nahin, Kamaal yeh hai ke jee rahy hain..
स्कूल तो बचपन मैं जाते थे अब तो बस ज़िन्दगी सिखाती है
तलासी ले ले ए दोस्त मेरी तू भी अगर जेबो में मजबूरी के सिवा कुछ ओर मिले तो ये ज़िन्दगी Continue Reading..
माँ तो माँ है जो पहेचान ही लेती है,* *की आँखें सोने से लाल है या रोने से !!
ये काजल, ये खुली-खुली जुल्फें , तुम यूँ ही जान माँग लेती इतना इंतजाम क्यूँ किया
मेरी बरबादियों में तेरा हाथ है मगर……. में सबसे कह रहा हूँ ये मुकद्दर की बात है…
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