-Kya Itne Door Nikal Aaye Hai Hum, Ke Tere Khayalo Me Bhi Nahi Aatey .. ‘
वो तो हम जैसे शायरों ने लफ़्ज़ों सेसजा रखा है… वरना मोहब्बत इतनी भी हसीं नहीँ होती…
चुनौतियो को स्वीकार करो क्योकि इससे या तो सफलता मिलेगी या सीख
उसे हमारी याद तब ही आती है जब उसके पास कोई और बात करने के लिए ना हो ।।।।
मंजूर थे हमें वक्त के सारे सितम मगर…. तुमसे बिछड़ कर जी लेना ~ सज़ा ज़रा ज्यादा हो गई !
बड़ी मुश्किल से बना हूँ टूट जाने के बाद, मैं आज भी रो देता हूँ मुस्कुराने के बाद !
कैसे बुरा कह दूँ तेरी बेवफाई को, यही तो है जिसने मुझे मशहूर किया है…
हमसे मोहब्बत का दिखावा न किया कर, हमे मालुम है तेरे वफा की डिगरी फर्जी है
दम तोड़ जाती है हर शिकायत लबों पे आकर, जब मासूमियत से वो कहती है मैंने क्या किया है
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