जिन्दगी में सताने वाले भी अपने थे, और दफनाने वाले भी अपने थे.
फिर से तेरी यादें मेरे दिल के दरवाजे पे खड़ी हैं वही मौसम, वही सर्दी, वही दिलकश ‘जनवरी’ है !!
बना के “ताजमहल” एक दौलतमंद आशिक ने….. “गरीबों” की मोहब्बत का तमाशा बना दिया।।
तुम से बिछड के फर्क बस इतना हुआ … तेरा गया कुछ नहीँ और मेरा रहा कुछ नहीँ…!
अपना परिचय अगर खुद देना पड़े, तो समझ लीजिये कि सफलता अभी दूर है..!
लोग कहते हैं नफ़रत ख़राब चीज़ है,* *तो मोहब्बत ने कौनसा झूला झुलाया है हमे.
जिँदगी से आप जो भी बेहतर से बेहतर ले सको ले लो क्योकि जिँदगी जब लेना शुरू करती है तो Continue Reading..
इतना शौंक मत रखो इन इश्क की गलियों में जाने का; क़सम से रास्ता जाने का है आने का नहीं!
जो बिना ठोकर खाए मजिँल तक पहुच जाते है उनके हाथ अनुभव से खाली रह जाते है
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