ऐ चाँद तू किस मजहब का है . ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा
जो भी आता हे समजा के चला जाता हे………. पर कोई समझने वाला नही मिलता
नफ़रत करना तो कभी सिखा ही नहीं,,, हमने दर्द को भी चाहा है अपना समझ कर… :))
थमने लगी है नब्ज़ की रफ्तार भी अब तो। असर उनसे बिछड़ने का.. बड़ा जानलेवा है।।
Kaun yaad rakhta hai pyar karne walo ko, Jo jitni gahri chot deta hai, wo utna hi yad rahtaa hai..
कामयाब होने के लिए अकेले ही आगे बढ़ना पड़ता है, लोग तो पीछे तब आते है, जब हम कामयाब होने Continue Reading..
यही सोच कर उसकी हर बात को सच मानते थे, के इतने खुबसूरत होंठ झूठ कैसे बोलेंगे.
अब तो इतवार में भी कुछ यूँ हो गयी है मिलावट छुट्टी तो दिखती है पर सुकून नजर नहीं आता
सोया रहा नसीब एक अरसे तक, जागने पर जरूरत सी खत्म हो गई अब
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *