ऐ चाँद तू किस मजहब का है . ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा
जो छलक न पाए ‘आँसू’ … उन्हें ‘बेबसी’ समझना … जो छलक जाए, उन्हें मेरी ‘बेसब्री’ समझना ।।
नसीहत देता हूँ इसका मतलब ये नही….. मैं समझदार हुँ…. बस हमने गलतिया आपसे ज्यादा की है।
जरुरी तो नहीं हर चाहत का मतलब इश्क हो कभी कभी कुछ अनजान रिश्तों के लिए भी दिल बेचैन हो Continue Reading..
यूँ तो आदत नहीं मुझे मुड़ के देखने की… तुम्हें देखा तो लगा…एक बार और देख लू…
थोडी सी रोशनी मांगी थी हमने मगर चाहने वाले ने तो आग ही लगा दी!!!!
बहुत देर करदी तुमने मेरी धडकनें महसूस करने में. वो दिल नीलाम हो गया, जिस पर कभी हकुमत तुम्हारी थी.
सहजता से निभ सके वे ही रिश्ते सुखद है जिन्हें निभाना पड़े वो रिश्ते नहीं दुनियादारी है !!
तुम तो मुझे रुलाकर दूर चले गये.. मै किससे पूछूँ मेरी खता क्या है..
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