::..कभी कभी लोग बेहतरकी तलाश में,
बेहतरीन को खो देते है..:
न जाने कैसी दिल्लगी थी उस बेवफा से, के मैंने आखिरी ख्वाहिश में भी उसकी वफ़ा मांगी…
कर्म भूमि पे फल के लिए श्रम सबको करना पडता है रब सिर्फ लकीरेँ देता है रंग हमको भरना पडता Continue Reading..
मेरे लफ़्ज़ों से न कर मेरे क़िरदार का फ़ैसला।। तेरा वज़ूद मिट जायेगा मेरी हकीक़त ढूंढ़ते ढूंढ़ते।
Gham_e_khas perr kabhi chup rhy … Kabhi rO diy gham_e_aam per …!!!
~ Suno Sahib Khatam Sirf Rishety Kiye Jate Haii Mohabbat Nahii .. ‘
पढ़ रहा हुं मैं इश्क की किताब अगर बन गया वकील तो , बेवफओं की खैर नही…।
आज भी प्यारी है मुझे तेरी हर निशानी .. फिर चाहे वो दिल का दर्द हो या आँखो का पानी।
सामान बाँध लिया है मैंने भी अब बताओ दोस्त , वो लोग कहाँ रहते है जो कहीं के नहीं रहते।
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