Dil bhi gustakh ho chala tha mera.. Shukar he aap be wafaa niklay..
कुछ अज़नबी लोग पहले अपना बनाते है! फिर अपना बनाकर छोड़ जाते है !
पढ़ रहा हूँ मै इश्क़ की किताब ऐ दोस्तों…… ग़र बन गया वकील तो बेवफाओं की खैर नही – v
“”कुछ तो रहम कर ए-संग दिल सनम, इतना तङपना तो लकीरों मे भी न था..
बादलों से कह दो अब इतना भी ना बरसें, गर मुझे उनकी याद आ गई, तो मुकाबला बराबरी का होगा…
~Woh Bhool Jayega Is Tarah .. Yaqeen Jano Yaqeen Nahii Aata .. ^
-Koii Toh Aiisa Ho Jo Siirf Mera Ho .. ‘
क्या खूब मेरे क़त्ल का तरीका तूने इजाद किया.. मर जाऊं हिचकियों से, इस कदर तूने याद किय
ख़ुशी कहा हम तो “गम” चाहते है, ख़ुशी उन्हे दे दो जिन्हें “हम” चाहते हे.
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