Dil bhi gustakh ho chala tha mera.. Shukar he aap be wafaa niklay..
ना जाने क्यों मुझे लोग मतलबी कहते है एक तेरे सिवा दुनियां से मतलब नहीं मुझे।
थमने लगी है नब्ज़ की रफ्तार भी अब तो। असर उनसे बिछड़ने का.. बड़ा जानलेवा है।।
Tafseel se kese sunayain yeh qissa mohabbat ka, Ke tum masroof ho ab tak humain barbaad karne mein
~Meiin Tumharii Woh Yaad Hoon, Jisey Tum Aksar Bhool Jatey Ho ..’
तेरी जुदाई का शिकवा करूँ भी तो किससे करूँ। यहाँ तो हर कोई अब भी मुझे तेरा समझता हैं…!!
अपने होंठो को मेरे होंठो से लगा दो, कोई शिकायत होगी भी तो कह नहीं पाउँगा..!!
तेरी यादें हर रोज़ आ जाती है मेरे पास, लगता है तुमने बेवफ़ाई नही सिखाई इनको..!
हमारी तो ज़ुबान भी इतनी बात नहीं करती •• जितनी तुम्हारी आंखें करती है
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