स्कूल तो बचपन मैं जाते थे अब तो बस ज़िन्दगी सिखाती है
कौन कहता है कि मुसाफिर ज़ख़्मी नहीं होते, रास्ते गवाह है बस गवाही नहीं देते.
तेरी मुहब्बत की तलब थी तो हाथ फैला दिए वरना, हम तो अपनी ज़िन्दगी के लिए भी दुआ नहीं करते…
Badal gae hain ab hum dono …! Na woh manti hai , na mai roht’ta Hun …!!!
लाख चाहू की तुझे याद न करू लेकिन इरादे अपनी जगह है और बेबशी अपनी जगह
-Akele Hum Hii Shamiil Nahii Haii Is Jurm Meiin ‘Jnaab Nazreiin Jab Milii Thii Muskuray Tum Bhii The .. ‘
Teri Talash Mein Nikloon Bhi To Kya Fayeda…!! Tu Badal Gaya Hai” Khoya Hota To Alag Baat Thi..
हजारों अश्क़ मेरी आँखों की हिरासत में थे, फिर उसकी याद आई और इन्हें जमानत मिल गई
हज़ारो मैं मुझे सिर्फ़ एक वो शख्स चाहिये जो मेरी ग़ैर मौजूदगी मैं मेरी बुराई ना सुन सके !!
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