आज दिन में ही रो लिया मैंने……. रात को नींद आ ही जायेगी…??
धोखा देती है अकसर मासुम चेहरो की चमक हर काँच का टुकडा हीरा नही होता
उम्र कैद की तरह होते हे कुछ रिश्ते ,, जहा जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नही!!
अपनों की चाहत मे मिलावट थी इस कदर. मैं तंग आकर दुश्मनों को मनाने निकल गया..
Kaun yaad rakhta hai pyar karne walo ko, Jo jitni gahri chot deta hai, wo utna hi yad rahtaa hai..
ये अच्छा है कि अच्छा नहीं हूँ मैं…!!! . . चलो कोई दुखी तो नहीं होगा मेरे मरने पे…!!!
मुझे सिर्फ इतना बता दो….इन्तजार करु….. या बदल जाऊ मै भी तुम्हारी तरह….
ऐ-दिल ज़रा मालूम तो कर,कहीं वो तो नहीं आ रहें . महफिल में उठा हैं शोर माशाअल्लाह-माशाअल्लाह
शायरी शौक नही, और नाही कारोबार है मेरा, बस दर्द जब सह नही पाता, तो लिख देता हूँ
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