आज दिन में ही रो लिया मैंने……. रात को नींद आ ही जायेगी…??
-Aap Khud Hi Apnii AdaaO Pe Zara Gaur Kijiye, Hum Araz Krengey Toh Shikayat Hogi .. ‘
गलती उनकी नहीं कसूरवार मेरी गरीबी थी दोस्तों, हम अपनी औकात भूलकर बड़े लोगों से दिल लगा बैठे.
हमने तुम्हें उस दिन से और ज़्यादा चाहा है, जबसे मालूम हुआ के तुम हमारे होना नही चाहते.
फुरसत अगर मिलें तो…मुझे पढ़ना जरूर,, शायद….. मैं ही तेरी उलझनों का…मुकम्मल जवाब हूँ…..!
मेरे लफ्जो से मत कर मेरे किरदार का फैसला . तेरा वजूद मिट जाएगा मेरी हकीकत ढुढते ढुढते ණ™
फ़रियाद कर रही है ये तरसी हुई निगाह, देखे हुए किसी को कई दिन गुज़र गए..
Tafseel se kese sunayain yeh qissa mohabbat ka, Ke tum masroof ho ab tak humain barbaad karne mein
सिलसिला ये चाहत का दोनो तरफ से था, वो मेरी जान चाहती थी और मैं जान से ज्यादा उसे।
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