Dil bhi gustakh ho chala tha mera.. Shukar he aap be wafaa niklay..
ऐ चाँद तू किस मजहब का है . ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा
जुबां कह न पाई मगर आँखे बोलती ही रही. कि मुझे सांसो से पहले तेरी जरूरत है.
बदल जाती है जिंदगी की सच्चाई उस वक्त, जब कोई तुम्हारा.. तुम्हारे सामने.. तुम्हारा नहीं होता.
तेरे बाद किसी को प्यार से ना देखा हमने….. हमें इश्क का शौक है, आवारगी का नही…
हम बने ही थे तबाह होने के लिए.. तेरा छोड़ जाना तो महज़ इक बहाना था.
हम क्यों ग़म करें गर वो हमें ना मिले.. अरे ! ग़म तो वो करें जिसे हम ना मिले…
क्या बयां करूँ कि लब अब खामोश रहते हैं, जुदा होकर उनसे हम अधूरे से लगते हैं
Kal tujhse bichrdne ka faisla kar liya tha!! Aj apne hi dil ko rishwat de rahi hu!! 🙁
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *