~ Meri Zindagii Ke Taliban Ho Tum Be’Maqsad Tabahi Macha Rakhii Haii ..’
मेरी बरबादियों में तेरा हाथ है मगर……. में सबसे कह रहा हूँ ये मुकद्दर की बात है…
दुआ करो की..मैं कोई रास्ता निकाल सकूँ… तुम्हे भी देख सकूँ…खुद को भी सम्भाल सकूँ….
~Zyada Kuch Naii Badla Haiin Tere Mere Beech Mein, Pehle Nafrat Na Thi Ab Pyar Nahii Haii .. ‘
Îshq mein fanaa ho jana hai Dastoor hi Yahi.. Jis mein ho Sabar ki Fitrat wo Îshq hi Nahi…
“तुम्ही आकर थाम लो ना मुझे .! बाबू सब ने छोड़ दिया है मुझे तेरा समझकर ..!!”
अधिक सीधा-साधा होना भी अच्छा नहीं होता है, सीधे वृक्ष सबसे पहले काट लिये जाते हैं।
चलो बिखरने देते है जिंदगी को अब, सँभालने की भी तो एक हद होती है…!
वक्त सिखा देता है इंसान को फलसफा जिंदगी का..!! फिर तो नसीब क्या .. लकीर क्या … और तकदीर क्या Continue Reading..
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