~ Meri Zindagii Ke Taliban Ho Tum Be’Maqsad Tabahi Macha Rakhii Haii ..’
तू मुझसे मिलने कभी नक़ाबों मे ही आ ! ख़ुद न मुमकिन तो ख़्वाबों मे ही आ !!
पता नहीं कैसे उसने मुझे छोड़ दिया, वो तो कमीनी…किसी के 5 रू. भी नहीं छोड़ती थी.
जिस के जी में जो आता है कह जाता है… दिल का क्या है सबकी सुन के रह जाता है…
मैं कौन हूँ यह पता चल जाये तोह मुझे भी बता देना… —” काफी दिनों से तलाश है मुझे मेरी Continue Reading..
इतनी बेरुखी ना करो कुछ तो रहम करो, तुम पर मरते हैँ तो क्या मार ही डालोगे…
कितनी बुरी आदत है ना मेरी….* *बहुत जल्दी भरोसा कर लेता हूं लोगो पर
वो कागज आज भी फुलो से ज्यादा महकता है दोस्तों जिस पर उन्होंने मजाक में लिखा था कि हमें तुमसे Continue Reading..
~Mujhe Kisi Ke Badl Jane Ka Gum Nahii , Bas Koi Aaiisa Tha Jis’se Aiisi Umeed Na Thi .. ^
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