यूँ बार बार निहारती हो आईना, ख़ूबसूरती पे गुमान है.. या शक।
अब खा ले कुछ तू भी बहुत भूखी होगी,,,, देख चाँद आया है फलक पर मोहब्बत बनकर ।।।
नही है मेरे पास दोलत का ढेर, . पर प्यार से पूरी दुनिया खरीदने की औकात रखता हूँ
अक्ल कहती है, ना जा कूचा-ए-क़ातिल की तरफ; सरफ़रोशी की हवस कहती है चल क्या होगा।
दुसरो की सफलता को देखकर जले नही क्योकि जलते तो वो लोग है जो मर जाते है
Socha Tha Uss Se Bichrenge Toh Mar Jayenge, Jaan Lewa Khauf Tha Bas, Hua Kuch Bhi Nahi.
रिश्तों के दलदल से, कैसे निकलेंगे जब हर साज़िश के पीछे, अपने निकलेंगे!
!Shukar MaaN Ke Maine tere se kabi ‘Mulaakat’ Nhi Ki, WarNaa Tere DiL Ko to TerE KhilaaF Krr DeTa….
लापरवाह सही तुम्हें याद तो करते है.. आदतें बुरी ज़रूर है दिल के बुरे नही है हम..
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