ऐ चाँद तू किस मजहब का है . ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा
वो कहते हैं हम जी लेंगे खुशी से तुम्हारे बिना, हमें डर है वो टूटकर बिखर जायेंगे हमारे बिना।
हर रोज़ खा जाते थे वो कसम मेरे नाम की, आज पता चला की जिंदगी धीरे धीरे ख़त्म क्यूँ हो Continue Reading..
itna na yad aao ki rat bhar so na sake, subhe ko surkh ankhon ka sabab puchte hai log.
बेक़रारी देख ली तूने, अब तू मेरी खामोशी देख इतना ख़ामोश रहूँगा मैं,की अब चीख़ उठेगी तू….
tab se hone lagi hai mujhe apne aap se mohabbat, jab se uski aankhon mai dekha hai mene pyar khud Continue Reading..
आज तक कायम है उसके लौट आने की उम्मीद आज तक ठहरी है जिंदगी अपनी जगह
मैं हँसता हूँ तो बस अपने ग़म छिपाने के लिए.. और लोग देख के कहते है काश हम भी इसके Continue Reading..
सारी ज़िंदगी रखा है बे-वफ़ा रिश्तों का भरम___!! सच पूछो तो कोई भी अपने “सिवा अपना” न था____!!!
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