दूर-दूर तक किसी का साया़ भी नहीं था
तुम्हारे जैसा इस शहर में कोई रहा भी नहीं था
आखिर किस जुर्म़ में छिन्न गयी हमसें हमारी हँसी
हमने तो किसी का दिल दुखाया भी नहीं था…!!
Related Posts
~Kismat Ki Lakeeron Par Aitbaar Karna Chor Dia Jab Insaan Badal Sakte Hain To Ye Lakeeren Kyun Nahi .. ^
Pata hai mari or apki muskan mai kya farkh hai… aap kush hokar muskurate hai…… aur hum aap ko kush Continue Reading..
इस तरह से लूटा है हमें इश्क-ए तमन्ना नें, कि ज़िन्दगी भी छीन ली और जान से भी नही मारा
“मजबूरियों के नाम पर दामन चुरा गये, वो लोग जिन की मोहब्बतों में दावे हजार थे ।”
मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं, पर सुना है सादगी में लोग जीने नहीं देते.
सूखे होठों से ही होती हैं मीठी बातें, प्यास जब बुझ जाये तो लहजे बदल जाते है..!!
Uski hansi mein chuppy dard ko mehsoos to kar Wo to yunhi hans hans ke khud ko saza deta hai…
“मौत ने पुछा- मैं आऊँगी तो, स्वागत करोगे कैसे…!! मैंने कहा- राह में फूल बिछाकर पूछुंगा… कि आने में इतनी Continue Reading..