मुद्दते हो गई चुप रहते.. कोई सुनता तो हम भी कुछ कहते…!!!
मौहब्बत की मिसाल में,बस इतना ही कहूँगा । बेमिसाल सज़ा है,किसी बेगुनाह के लिए ।
तूने फैसले ही सारे दूर जाने वाले किये, नहीं तो बता मेरे से करीब तेरे और कौन था।
दोस्त को दौलत की निगाह से मत देखो , वफा करने वाले दोस्त अक्सर गरीब हुआ करते हैं….!!
तेरी जरूरत, तेरा इंतजार और ये तन्हा आलम, थक कर मुस्कुरा देती हूँ, मैं जब रो नहीं पाती !!
वो बात क्या करू जिसकी खबर ही न हो, वो दुआ क्या करू जिसमे असर ही न हो. कैसे कह Continue Reading..
शुक्र है हँसी बाजार में नहीं बिकती साहब, वरना लोग गरीबों से यह भी छीन लेते
शब्द “दिल” से निकलते हैं… “दिमाग”से तो उसके मतलब निकलते हैं…
अगर बेवफाओं की अलग ही दुनिया होती तो, मेरे वाली…कमीनी…वहाँ की रानी होती
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