Preet Singh Leave a comment आज एक जगह किसी ने ‘लंगड़ा’ आम का ज़िक्र किया तो दुसरे भाईसाब ने टोकते हुए कहा- ‘दिव्यांग आम कहिये’। …. आज मुझे महसूस हुआ कि इन्सानित अब भी जिंदा है इस स्वार्थी संसार में । Copy