~ Suno Sahib Khatam Sirf Rishety Kiye Jate Haii Mohabbat Nahii .. ‘
सुनसान सी लग रही है , आज ये शायरों की बस्ती….* *क्या किसी के दिल मे , अब दर्द नहीं Continue Reading..
*मैं गलती करूँ तब भी मुझे सीने से लगा ले* *कोई ऐसा चाहिये जो मेरा हर नखरा उठाले*
सांपो के मुक्कदर में.. वो जहर कहाँ, जो आजकल इन्सान सिर्फ बातों मे ही उगलतें है।
सारी उम्र मैं जोकर सा बना रहा, तेरे पीछे जिंदगी सर्कस हो गयी।
लोग तो वही रहते है बस वक्त के साथ उनका बर्ताव बदल जाता है
गुज़रे है आज इश्क के उस मुकाम से, नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से ।
*न जाने कैसी “नज़र” लगी है “ज़माने” की…* कमब्खत *”वजह”* ही नही मिलती *”मुस्कुराने”* की.
-Guzar Hi Jayengi Furqat Ki Ye Lambii Raatein, Jo Tu Nahi Na Sahi Tera Intezaar To Haii .. ‘
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