~Woh Ek Shakhs Zindagi Jaisa, Aur Woh Hii Merii Zindagi Mein Nahi ..’
बंजर नहीं हूँ मैं मुझमें बहुत सी नमी है,,,, आँखे बयाँ नही करती बस इतनी सी कमी है!!!
~एक बार देखा था उसने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए, बस! इतनी सी हकीकत है, बाकी सब कहानियाँ हैं .. ^
हमने कहाँ आज कुछ मीठा बनाओ उन्होंने ऊगली अपने होठो पर रख दी !
~ Marham Na Sahii Ek Zakham Hii Dedo, Mehsoos Toh Ho Ke Bhule Nahii Ho Tum .. ‘
मौत को देखा तो नही पर शायद वो बहुत खूबसूरत होगी, कम्बख्त जो भी उस्से मिलता है जीना छोड देता Continue Reading..
मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदलकर देख, मुझसे भी बुरे हैं लोग तू घर से निकलकर देख…!
तेवर तो हम वक्त आने पर दिखायेँगेँ.. शहर तुम खरीद लो हूकूमत हम चलायेँगेँ
-Guzar Hi Jayengi Furqat Ki Ye Lambii Raatein, Jo Tu Nahi Na Sahi Tera Intezaar To Haii .. ‘
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