~Kitnii Dilkash Hai Us Ki Khamoshii, Sarii Bateiin Fazool Hon Jaiise .. ‘
जिंदगी में बडी शिद्दत से निभाओ अपना किरदार, कि परदा गिरने के बाद भी तालीयाँ बजती रहे……!!!
सीख रहा हूँ धीरे-धीरे तेरे शहर के रीवाज . जिस से मतलब निकल जाये उसे जिंदगी से निकाल दो
खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की … आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है…
दोनों साथ गये हैं वक्त बिताने डिनर पर.. बातें मगर उनसे.. मोबाइल कर रहा है!
Tumhe ulfat nahin mujhse mujhe nafrat nahin tumse, Ajab shikwa sa rehta hai tumhe mujhse mujhe tumse..
न रुकी वक़्त की गर्दिश और न ज़माना बदला……!! . . पेड़ सूखा तो परिन्दों ने ठिकाना बदला……!!
गिला बनता ही नहीं बेरुखी का, दिल ही तो है, भर गया होगा।
सिलसिला ये चाहत का दोनो तरफ से था, वो मेरी जान चाहती थी और मैं जान से ज्यादा उसे
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