सांपो के मुक्कदर में.. वो जहर कहाँ, जो आजकल इन्सान सिर्फ बातों मे ही उगलतें है।
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जिंदगी भी अजीब है जैसे जैसे कम हो रही है वैसे वैसे ज्यादा पसंद आती जा रही है…!!
कुछ गुनाह तो तेरे भी होंगे, तभी खुदा ने मुझे तुझसे जुदा कर दिया. .
निगाहों से भी चोट लगती है जब हमें कोई देखकर भी अनदेखा कर देतें हैं !!
है ये मेरी बदनसीबी तेरा क्या कुसूर इसमें, तेरे ग़म ने मार डाला मुझे ज़िन्दग़ी से पहले…..!!!
मोहब्बत हो या काला धन….. छुपाकर रखोगें तो नुकसान खुद का ही है..
जनाज़ा इसीलिए भारी था उस गरीब का…!! क्योकि वह सारे अरमान साथ लेकर चला गया…!!
Tujhe koi aur bhi chahe, is baat se dil thoda jalta hai, Par fakar hai mujhe, meri pasand pe bhi Continue Reading..
जो मेरी आँखो मे पलको पे रहता था, आज काजल लगाया तो बहुत याद आया।
