शब्द “दिल” से निकलते हैं… “दिमाग”से तो उसके मतलब निकलते हैं…
जिंदगी सफ़र पर निकल चुकी है… मंजिल कब मिलेगी तू ही बता ये मेरे खुदा..!
दूर उन्हें जाना था ये …. एहसास तो था लेकिन……!!* *बिछड़ना इस कदर होगा …..ये ख्याल ना आया …..
Mat puchh kaise guzar rahi hai zindagi, Us daur se guzar rahi hu jo guzarta hi nahi
अजीब है इन्सान की शख़्सियत यारों, हवस ख़ुद की उठती है “तवायफ़” उसे बोलता है…
छू जाते हो तुम 👈 मुझे हर रोज एक नया ख्वाब 👼 बनकर ये दुनिया तो खामखां कहती है कि Continue Reading..
हजारो बार ली हैं तलाशियाँ तुमने मेरे दिल
दोस्तो से अच्छे तो मेरे दुश्मन निकले,, कमबख्त हर बात पर कहते हैं कि तुझे छोडेंगे नहीं.
मुझे मालूम है कि ये ख्वाब झूठे हैं और ख्वाहिशें अधूरी हैं… . मगर जिंदा रहने के लिए कुछ गलतफहमियां Continue Reading..
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