मजबुरीयां तुमहारी थी और देख …!! तनहा हम हाे गऐ
मैं रोज अपने खून का दिया जलाऊँगा, ऐ इश्क तू एक बार अपनी मजार तो बता
तुम दूर हो या पास फर्क किसे पड़ता है, तू जँहा भी रहे तेरा दिल तो यँही रहता है..
देख कर उसको तेरा यूँ पलट जाना। नफ़रत बता रही है, तूने महोब्बत् गजब की थी।।
~Nahi Haii Meri Fitrat Mein Yeh Adaat, Warna Teri Tarah Badlna Mujhe Bhii Aata Haii .. ‘
सीढिया उन्हे मुबारक हो…..जिन्हे छत तक जाना है….. हमारी मन्जिल तो आसमान है..रास्ता हमे खुद बनाना है..।
तेरा नाम जुबाँ पर आते आते रुक जाता है… . जब कोई मुझसे मेरी आखरी ख्वाहिश पूछता है…
~Bas Ek RaaT Mulaqat Ka Hua Wada, Wo Din Or Aj ka Din Neend Phir Nahi Ayi .. ^
मुझको खो दोगे तो पछताओगे बहुत …! ये आखरी गलती तुम बहुत सोच-समझ कर करना …!!
Your email address will not be published. Required fields are marked *
Comment *
Name *
Email *