आँसू वो खामोश दुआ है जो सिर्फ़ खुदा ही सुन सकता है।
वो सामने आये तो अज़ब तमाशा हुआ; हर शिकायत ने जैसे ख़ुदकुशी कर ली।
कैसे करूँ मैं साबित…कि तुम याद बहुत आते हो… एहसास तुम समझते नही…और अदाएं हमे आती नहीं…
पतंग सी हैं जिंदगी, कहाँ तक जाएगी..! रात हो या उम्र, एक ना एक दिन कट ही जाएगी.
गलती उनकी नहीं कसूरवार मेरी गरीबी थी दोस्तों, हम अपनी औकात भूलकर बड़े लोगों से दिल लगा बैठे.
बेवफाई तो सभी कर लेते है जानेमन , तू तो समझदार थी कुछ तो नया करती
Meri Wafa Fareb Thi,, Meri Wafa Pe khaak Daal.!! Tujh Sa Hi koi Ba’Wafa Tujh Ko Mily Khuda Kary.!!
जिंदगी जला दी हमने जब जैसी जलानी थी, अब धुऐ पर तमाशा कैसा और राख पर बहस कैसी.
जाते-जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया उम्र भर ना दोहरा पाऊ ऐसी कहानी दे गया।
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