आँसू वो खामोश दुआ है जो सिर्फ़ खुदा ही सुन सकता है।
ज़िन्दगी में अपनापन तो हर कोई दिखाता है, पर अपना है कौन ये वक़्त बतलाता है।
वो तो हम जैसे शायरों ने लफ़्ज़ों सेसजा रखा है… वरना मोहब्बत इतनी भी हसीं नहीँ होती…
सांपो के मुक्कदर में.. वो जहर कहाँ, जो आजकल इन्सान सिर्फ बातों मे ही उगलतें है।
Tark-e-Ulfat Jo Kia Hai To Sambhalo Khud Ko Kiun Mere Khawabon Me Roz Chale Ate Ho…
लोग कहते हैं कि मेरी पसंद खराब है, 🙍 लेकिन फिर भी मैं तुम्हें पसंद करता हूं.
अगर किसी की उसकी औकात से ज्यादा इज्जत करलो, तो वो खुद को तुम्हारा बाप समझने लगता है !!
मौत को देखा तो नही पर शायद वो बहुत खूबसूरत होगी, कम्बख्त जो भी उस्से मिलता है जीना छोड देता Continue Reading..
क्या बयां करूँ कि लब अब खामोश रहते हैं, जुदा होकर उनसे हम अधूरे से लगते हैं
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